Sunday, July 15, 2018
PDF फाइल को फोटो की तरह इस्तेमाल कैसे करें/how to convert PDF file to JPG file.
PDF फाइल का इस्तेमाल तो हम करते हैं, लेकिन क्या आप PDF फाइल को फोटो की तरह इस्तेमाल करना चाहते हैं? अथवा क्या आप PDF फाइल को jpg फॉर्मेट में कन्वर्ट करना चाहते हैं? ऐसे में हम आपको 2 तरीकों के बारे में बताने जा रहे हैं जिनकी मदद से आप PDF फाइल को JPG फॉर्मेट में कन्वर्ट कर सकते हैं।
पहला तरीका- ऐप की मदद से कन्वर्ट करें
1-Google Store पर जाकर pdf to jpg converter ऐप्स को डाउनलोड करें।
2-ऐप को ओपन करें। यहां आप को Select file का ऑप्शन दिखाई देगा, इस पर क्लिक करें।
3-अब Open बटन पर क्लिक करें और उस PDF फाइल को चुने जिसे आप JPG फॉर्मेट में कन्वर्ट करना चाहते हैं
4-select folder आइकन पर क्लिक करें।
5-आप फोल्डर को चुने जहां पर अपनी फाइल को सेव करना चाहते हैं इसके बाद सेलेक्ट फोल्डर बटन पर क्लिक करें
6-इसके बाद convert बटन पर क्लिक करें फाइल की साइज कितनी बड़ी है इसके हिसाब से समय लगेगा।
दूसरा तरीका- वेब टूल का इस्तेमाल करें
ऑनलाइन टूल्स की मदद से आप मोबाइल पर किसी भी PDF फाइल को जेपीजी में बदल सकते हैं।
1-ZAMZAR PDF TO JPG CONVERSION tool को अपने वेब ब्राउज़र में एक्टिवेट करें। इसके बाद दिए गए सभी निर्देशों को फॉलो करें।
2-choose file बटन पर क्लिक करके अपने फाइल को चुने।
3-इसके बाद JPG फॉर्मेट को चुने।
4-अब अपने उस ईमेल ID का एड्रेस डाले जहां आप अपनी कन्वर्ट की हुई फाइल को सेव करना चाहते हैं।
5-उसके बाद कन्वर्ट बटन पर क्लिक करें।
अब आपकी फाइल PDF से JPG फॉर्मेट में कन्वर्ट होने लगेगी। कन्वर्ट हो जाने पर आपके दिए हुए मेल ID पर एक लिंक आएगा जिस पर क्लिक करके दी हुई फाइल को डाउनलोड कर सकेंगे।
इसके अलावा आप Photoshop और Mac operating सिस्टम की मदद से भी PDF फाइल को जेपीजी फॉर्मेट में बदल सकते हैं।
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धन्यवाद।
Saturday, July 14, 2018
Whatsapp स्टेटस के फोटो और वीडियो को डाउनलोड कैसे करें ?
अगर आप अपने दोस्तों की WhatsApp स्टेटस की फोटो और वीडियो को डाउनलोड करना चाहते हैं तो हम आपको कुछ आसान तरीकों के बारे में बताना चाहते हैं। इन स्टेप्स के माध्यम से आप WhatsApp स्टेटस को डाउनलोड कर सकते हैं तो आइए जानते हैं।
पहला तरीका-
1-आप जिन दोस्तों के स्टेटस से फोटो वीडियो डाउनलोड करना चाहते हैं पहले उसे देखें।
2-अब आप अपने स्मार्ट फोन के फाइल मैनेजर पर जाएं।
3-सेटिंग में जाकर show hidden files पर टैप करें।
4-अब WhatsApp मीडिया स्टेटस को नेविगेट करें।
5-यहां आप सभी Whatsapp स्टेटस को देख सकेंगे।
6-फाइल को कॉपी करके किसी और फोल्डर में सेव कर ले।
7-इस तरह आप किसी भी दोस्त के स्टेटस की फोटो और वीडियो डाउनलोड कर सकते हैं।
दूसरा तरीका-
1-Google Play Store से WhatsApp स्टेटस डाउनलोड मैनेजर ऐप डाउनलोड करें और इंस्टॉल करें।
2-आप अपने WhatsApp पर अकाउंट में जाकर स्टेटस में जाएं।
3-आप जिन दोस्तों के स्टेटस की फोटो या वीडियो डाउनलोड करना चाहते हैं उसे देखें।
4-अब इंस्टॉल किए ऐप को ओपन करें।
5-जहां से आप टैप करके जो स्टेटस डाउनलोड करना चाहते हैं कर ले।
पहला तरीका किसी-किसी ऑपरेटिंग सिस्टम में काम नहीं भी कर सकता है ऐसे में आप दूसरा तरीका भी अपना सकते हैं।
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धन्यवाद।
Monday, June 25, 2018
इन 5 तरीकों से स्मार्टफोन की बैटरी लाइफ बढ़ा सकते हैं
कितने भी MAH की बैटरी स्मार्टफोन में क्यों ना लगी हो लेकिन स्मार्ट फोन में बैटरी की समस्या बनी ही रहती है। कई लोग तो दिनभर पावर बैंक लेकर घूमते रहते हैं लेकिन आप कुछ तरीकों से अपने स्मार्टफोन की बैटरी को 40% तक बचा सकते हैं। आइए जानते हैं।
Airplane mode-
एयरप्लेन मोड के बारे में तो आप लोग जानते ही होंगे, इसमें आपकी फोन की बैटरी बचती है। इसके ऑन करने के दौरान ना तो आप फोन कर पाएंगे, ना ही फोन रिसीव कर पाएंगे। विमान में यात्रा करते समय आप इसका इस्तेमाल कर सकते हैं। एयरप्लेन मोड में सिर्फ 5 फ़ीसदी बैटरी खपत होती है।
Wi-Fi
अगर आपके आस पास वाईफाई है, तो मोबाइल के इंटरनेट का इस्तेमाल ना करें, क्योंकि मोबाइल नेटवर्क पर वाई-फाई के मुकाबले ज्यादा बैटरी खर्चा होती है। 4जी की तुलना में वाई फाई के इस्तेमाल पर 40 फ़ीसदी बैटरी कम खर्च होती है।
फोन को गर्म ना होने दें।
फोन को हमेशा धूप से बचा कर रखें, क्योंकि फोन जितना गर्म होगा बैटरी उतनी ही तेजी से खत्म होगी।
बैटरी को 100 फ़ीसदी चार्ज ना करे।
बैटरी को 80 परसेंट चार्ज होते ही फोन को चार्जिंग से निकाल दें और ख्याल रखें कि फोन की बैटरी 0% भी ना हो जाए। अगर फोन इस्तेमाल नहीं भी करना है, तो चार्ज करके ही रखें।
सोशल मीडिया पर ऑटो प्ले वीडियो बंद रखें।
Facebook, Twitter और Google Chrome में ऑटो प्ले वीडियो का ऑप्शन आता है, उसे हमेशा बंद रखें, क्योंकि इनके कारण बैटरी बहुत ज्यादा खपत होती है। इसके अलावा फोन को बार बार चार्ज में ना लगाएं और चार्जिंग के दौरान फोन पर बात ना करें।
इन तरीकों को अपनाकर आपके स्मार्टफोन की बैटरी लाइफ को और बढ़ा सकते हैं, तो देर किस बात की आज ही इन तरीकों का प्रयोग करें।
हमसे जुड़ने के लिए धन्यवाद।
Friday, June 22, 2018
LTE और VOLTE क्या है ?
JIO के आने के पहले हम 3G नेटवर्क ही चला रहे थे लेकिन जिओ के आने के बाद हम बहुत जल्दी कुछ नए शब्द सीख लिए। और उसका मतलब जानने के लिए Google करने लगे। साथ ही फोन लेते समय हम ध्यान देते हैं कि कौन LTE सपोर्ट करता है और कौन VOLTE तो चलिए जानते हैं LTE और VOLTE तकनीक क्या है और यह कैसे काम करती है।
LTE and VOLTE technique in Hindi
LTE क्या है-
LTE मोबाइल internet जनरेशन की चौथी पीढ़ी है। जो 3g तकनीक से अधिक तेज डाटा प्रदान करती है इसे long term evolution के नाम से भी जाना जाता है LTE and 4G दोनों एक ही चीज है। भारत में 4जी एलटीई की सेवा देने वाले आपरेटर्स को ऑक्शन प्रदान किए गए हैं
VOLTE क्या है-
LTE या 4G तकनीक के जरिए होने वाली कॉल्स को VOLTE के नाम से जानते हैं इसे voice over long term evolution भी कहा जाता है। इसके अलावा इस तकनीक के जरिए होने वाली कॉल्स को हम HD कान कॉल भी कहते हैं क्योंकि ऐसे में कॉल क्वॉलिटी बेहतरीन हो जाती है।
हमसे जुड़े रहने के लिए धन्यवाद।
Wednesday, June 13, 2018
धीरे चलने वाले स्मार्टफोन को इन तरीकों से बनाएं सुपरफास्ट
होमस्क्रीन को साफ रखें-
कई लोग ऐसे होते हैं जो इस स्मार्टफोन की होम स्क्रीन पर बहुत सारे ऐप्स रखते हैं जो कि फोन कि धीमाजोकि फोन के धीमा होने का सबसे बड़ा कारण है ऐसे में फोन की होम स्क्रीन पर मौसम, लाइव वॉलपेपर जैसे एप्प के आइकन है तो उन्हें हटा दें।
ऑटो सिंक -
आजकल स्मार्ट फोन में ऑटो सिंक ऑन ही रहता है जिससे फोन के डाटा का बैकअप बैकग्राउंड में ही चलता रहता है। ऑटो सिंक को बंद कर दें आपका फोन पहले के मुकाबले तेज चलने लगेगा।
डाटा सेवर मोड को ऑन करें-
Google Chrome में डाटा सेवर मोड ऑन करने का फायदा होता है कि आप कोई भी साइट ओपन करते हैं तो उस साइट पर मौजूद वीडियो और फोटो की क्वालिटी थोड़ी कमजोर हो जाती है। ऐसे में हैवी पेज आसानी से लोड हो जाते हैं। जिससे आपका स्मार्टफोन तेज चलने लगता है।
कैशे मेमोरी क्लियर करें-
कुछ देर फोन को इस्तेमाल करने पर स्टोरेज में कैशे मेमोरी बनती है जो आपके स्मार्टफोन के स्टोरेज को घेरती है और ऐसे में आपका स्मार्ट फोन स्लो हो जाता है। कैशे मेमोरी क्लियर करने के लिए फोन की सेटिंग में जाकर स्टोरेज ओपन कर कैशे मेमोरी क्लियर कर दें।
स्मार्टफोन के ऑपरेटिंग सिस्टम को अपडेट रखें-
कई कंपनियां समय-समय पर स्मार्टफोन के लिए अपडेट जारी करते हैं ऐसे में अपना स्मार्टफोन जरूर अपडेट करें। इसके लिए सेटिंग में जाकर अबाउट ओपन कर अपडेट चेक कर सकते हैं।
कोई उपाय काम ना करे तो रिसेट करें-
अगर सारे उपाय करने के बाद भी आपका फोन स्लो चल रहा है तो डाटा का बैकअपडाटा का बैकअप लेने के बाद फोन को फैक्ट्री रिसेट करें। रिसेट करने के बाद फोन एकदम नया जैसा हो जाएगा।
हमसे जुड़े रहने के लिए धन्यवाद।
गैस सब्सिडी का पैसा बैंक अकाउंट में आता है या नहीं कैसे चेक करें/how to check gas subsidy in bank account.
आप रसोई गैस सिलेंडर सब्सिडी पर ले रहे हैं तो इस स्कीम के तहत ग्राहकों को एक तय कीमत पर रसोई गैस सिलेंडर मिलता है और बाद में कुछ राशि बैंक अकाउंट में वापस कर दी जाती है
परेशानी तब होती है जब हमें पता ही नहीं चलता कि सब्सिडी का पैसा बैंक अकाउंट में आ रहा है कि नहीं और आ रहा है तो कितना आ रहा है ? चलिए आज हम आपको एक तरीका बताते है
सबसे पहले स्मार्ट फोन के ब्राउज़र में www.mylpg.in टाइप करें। अब आपको दाहिनी और गैस कंपनियों के नाम मिलेंगे उनमें से अपने सर्विस प्रोवाइडर पर क्लिक करें इसके बाद आपसे LPG ID और रजिस्टर मोबाइल नंबर मांगा जाएगा। इसके बाद ओके करने पर आपको वित्तीय वर्ष डालना होगा। इसके बाद आपको सब्सिडी की डिटेल मिल जाएगी।
इसमें आपको कब कब और कितनी सब्सिडी की राशि बैंक अकाउंट में मिली इसकी जानकारी मिल जाएगी। वही आपके अकाउंट में सब्सिडी का पैसा नहीं आ रहा तो आप फीडबैक वाले बटन पर क्लिक करके शिकायत भी कर सकते हैं
अगर आपने LPG ID को अकाउंट से लिंक नहीं किया है तो आप डिस्ट्रीब्यूटर से मिलकर समस्या का समाधान कर सकते हैं साथ ही आप इस टोल फ्री नंबर 1800 2333555 पर फ्री कॉल करके शिकायत कर सकते हैं
हमसे जुड़े रहने के लिए धन्यवाद।
Sunday, June 10, 2018
एंड्रॉयड फोन इस्तेमाल करते हैं तो ये 5 सेटिंग्स आपको पता होने चाहिए
मैग्निफिकेशन गेस्चर -
इस फीचर को ऑन करने के बाद किसी भी वक्त डिस्प्ले पर लगातार तीन बार टैप करने पर डिस्प्ले पर दिखने वाला कोई भी कंटेंट जूम हो जाएगा और उसके बाद आप उसे ड्रैग करके पूरा कंटेंट पढ़ सकेंगे। वहीं फिर से लगातार तीन बार टैप करने पर आप जूम मोड से बाहर आ जाएंगे। इस फीचर को आप सेटिंग्स में एक्सेसिबलिटी में जाकर ऑन कर सकते हैं।
इस फीचर को ऑन करने के बाद किसी भी वक्त डिस्प्ले पर लगातार तीन बार टैप करने पर डिस्प्ले पर दिखने वाला कोई भी कंटेंट जूम हो जाएगा और उसके बाद आप उसे ड्रैग करके पूरा कंटेंट पढ़ सकेंगे। वहीं फिर से लगातार तीन बार टैप करने पर आप जूम मोड से बाहर आ जाएंगे। इस फीचर को आप सेटिंग्स में एक्सेसिबलिटी में जाकर ऑन कर सकते हैं।
टेक्स्ट टू स्पीच-
इस फीचर को ऑन करने के बाद आप अपने फोन दिखने वाले किसी भी कंटेंट को सुन सकते हैं। दरअसल इस फीचर के जरिए एंड्रॉयड फोन आपके फोन की डिस्प्ले पर दिखने वाले टेक्स्ट को ऑडियो में कन्वर्ट कर देता है। उदाहरण के तौर पर अगर आप किसी काम में व्यस्त हैं और किसी न्यूज को पढ़ना चाहते हैं तो यह फीचर उस न्यूज को आपको पढ़कर सुना सकता है। इस फीचर को आप सेटिंग्स में एक्सेसिबलिटी में जाकर ऑन कर सकते हैं।
इस फीचर को ऑन करने के बाद आप अपने फोन दिखने वाले किसी भी कंटेंट को सुन सकते हैं। दरअसल इस फीचर के जरिए एंड्रॉयड फोन आपके फोन की डिस्प्ले पर दिखने वाले टेक्स्ट को ऑडियो में कन्वर्ट कर देता है। उदाहरण के तौर पर अगर आप किसी काम में व्यस्त हैं और किसी न्यूज को पढ़ना चाहते हैं तो यह फीचर उस न्यूज को आपको पढ़कर सुना सकता है। इस फीचर को आप सेटिंग्स में एक्सेसिबलिटी में जाकर ऑन कर सकते हैं।
इन्वर्ट कलर-
इस फीचर को भी आप सेटिंग्स में एक्सेसिबलिटी में जाकर ऑन कर सकते हैं। इसकी मदद से आप फोन का डिफॉल्ट बैकग्राउंड कलर बदल जाएगा।
इस फीचर को भी आप सेटिंग्स में एक्सेसिबलिटी में जाकर ऑन कर सकते हैं। इसकी मदद से आप फोन का डिफॉल्ट बैकग्राउंड कलर बदल जाएगा।
टॉकबैक-
अगर आपकी आंखें कमजोर हैं या चश्मा घर पर भूल गए हैं तो यह फीचर आपके लिए काफी मददगार साबितो होगा। एंड्रॉयड फोन में टॉकबैक फीचर को ऑन करने के बाद आप फोन में जब टच करेंगे तो फोन आपको बताएगा कि आप क्या टच कर रहे हैं और किस ऐप पर टच कर रहे हैं। इस फीचर को आप सेटिंग्स में एक्सेसिबलिटी में जाकर ऑन कर सकते हैं।
अगर आपकी आंखें कमजोर हैं या चश्मा घर पर भूल गए हैं तो यह फीचर आपके लिए काफी मददगार साबितो होगा। एंड्रॉयड फोन में टॉकबैक फीचर को ऑन करने के बाद आप फोन में जब टच करेंगे तो फोन आपको बताएगा कि आप क्या टच कर रहे हैं और किस ऐप पर टच कर रहे हैं। इस फीचर को आप सेटिंग्स में एक्सेसिबलिटी में जाकर ऑन कर सकते हैं।
इंटरेक्शन कंट्रोल-
इस फीचर की मदद से आप फोन के किसी खास टच हिस्से को ब्लॉक कर सकते हैं। यानि अगर आप चाहते हैं तो नोटिफिकेशन बार पर टच फीचर काम ना करे तो इस फीचर को ऑन कर सकते हैं।
इस फीचर की मदद से आप फोन के किसी खास टच हिस्से को ब्लॉक कर सकते हैं। यानि अगर आप चाहते हैं तो नोटिफिकेशन बार पर टच फीचर काम ना करे तो इस फीचर को ऑन कर सकते हैं।
हम से जुड़े रहने के लिए धन्यवाद्।
माइक्रोवेव खरीदने जा रहे हैं, तो जानें सब कुछ
माइक्रोवेव अब लगभग सभी घरों में एक जरूरी होम एप्लायंसेज के रूप में देखा जाने लगा है। यह खाना पकाने में बहुत सहायता करता है। बात चाहे बैचलर्स के लिए झट से पकने वाले क्विक मील्स की हो या किसी गृहिणी के लिए खाने को दोबारा से चुटकियों में गर्म करना की। इसने हमारे किचन के कई कामों को पहले से कहीं ज्यादा आसान बना दिया है। यदि आप माइक्रोवेव खरीदने की सोच रहे हैं और आपको अपनी जरूरतों के हिसाब से यह तय कर पाना मुश्किल लग रहा है कि किस साइज और किस प्रकार का माइक्रोवेव खरीदें, तो कुछ जरूरी बातें हैं, जिन्हें आप नया माइक्रोवेव ओवन खरीदते समय ध्यान में जरूर रखें।
माइक्रोवेव के प्रकार
माइक्रोवेव के प्रकार
सोलो या कन्वेंशनल माइक्रोवेव- यह माइक्रोवेव छोटा होता है और आसानी से ऑपरेट किया जा सकता है। इसकी कीमत भी अधिकतर लोगों के बजट में आसानी से समा सकती है। इसमें बेकिंग और ग्रिलिंग को छोड़कर डिफ्रॉस्टिंग फूड और खाना गर्म करने जैसे बेसिक कामों के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है। इसको खरीदते समय इस बात का खास ध्यान रखें कि इसके अंदर रखा खाना अच्छी तरह से दिखता हो। साथ ही बनावट ऐसी हो कि आप इसे आसानी से साफ कर सकें।सोलो माइक्रोवेव की कीमत फिलहाल बाजार में साइज और अलग-अलग कंपनियों के आधार पर करीब 4,500 से 8,000 रुपये के बीच है।
ग्रिल माइक्रोवेव
यह सोलो माइक्रोवेव से बिल्कुल अलग बेकिंग, ग्रिलिंग और टोस्टिंग जैसे कई काम करता है। फिलहाल यह बाजार में करीब 5,000 से 15,000 रुपये की कीमत में मिल जाता है।
यह सोलो माइक्रोवेव से बिल्कुल अलग बेकिंग, ग्रिलिंग और टोस्टिंग जैसे कई काम करता है। फिलहाल यह बाजार में करीब 5,000 से 15,000 रुपये की कीमत में मिल जाता है।
कंवेक्शन माइक्रोवेव- इस माइक्रोवेव का उपयोग बारबेक्यू सहित बाकी सभी खाना पकाने के कामों में किया जा सकता है। दरअसल यह किसी भी खाने को बेहतर बनाने के लिए उसे समान रूप से गर्म करता है। यह सोलो माइक्रोवेव और ग्रिल माइक्रोवेव की तुलना में अधिक महंगा है। इसकी कीमत करीब 9,000 से 25,000 रुपये के बीच है
कन्वेंशनल VS कंवेक्शन
कन्वेंशनल माइक्रोवेव ओवन हॉट माइक्रोवेव्स यानी तरंगे पैदा करता है, जो खाने को गर्म करने के लिए ग्लास और स्टील के कंटेनरों से गुजरती हैं। ये बेसिक माइक्रोवेव टेक्नोलॉजी को रेडिएंट हीट के साथ जोड़ती हैं और ओवन में रखे खाने को गर्म करने के लिए गर्म हवा छोड़ती है। दूसरी ओर कंवेक्शन माइक्रोवेव के पास गर्म हवा को ओवन में फैलाने के लिए एक हीटिंग एलिमेंट के साथ फैन भी होता है, जिसकी वजह से खाना एकसमान पकता है। प्रि
कन्वेंशनल माइक्रोवेव ओवन हॉट माइक्रोवेव्स यानी तरंगे पैदा करता है, जो खाने को गर्म करने के लिए ग्लास और स्टील के कंटेनरों से गुजरती हैं। ये बेसिक माइक्रोवेव टेक्नोलॉजी को रेडिएंट हीट के साथ जोड़ती हैं और ओवन में रखे खाने को गर्म करने के लिए गर्म हवा छोड़ती है। दूसरी ओर कंवेक्शन माइक्रोवेव के पास गर्म हवा को ओवन में फैलाने के लिए एक हीटिंग एलिमेंट के साथ फैन भी होता है, जिसकी वजह से खाना एकसमान पकता है। प्रि
माइक्रोवेव का आकार
माइक्रोवेव का आकार लोगों के हिसाब से चुना जा सकता है, जिनके लिए भोजन बनाया जाना है। मान लीजिए कि आपके परिवार में दो-तीन सदस्य हैं, तो एक छोटे आकार वाला माइक्रोवेव (18-20 लीटर) सबसे अच्छा होगा। इसी तरह बड़े परिवार के लिए खाना पकाना हो, तो हाई पावर के साथ एक बड़े माइक्रोवेव की आवश्यकता होगी। इस वर्ग के लिए बड़े आकार वाले माइक्रोवेव (23-28 लीटर) बाजार में सबसे ज्यादा लोकप्रिय हैं।
माइक्रोवेव का आकार लोगों के हिसाब से चुना जा सकता है, जिनके लिए भोजन बनाया जाना है। मान लीजिए कि आपके परिवार में दो-तीन सदस्य हैं, तो एक छोटे आकार वाला माइक्रोवेव (18-20 लीटर) सबसे अच्छा होगा। इसी तरह बड़े परिवार के लिए खाना पकाना हो, तो हाई पावर के साथ एक बड़े माइक्रोवेव की आवश्यकता होगी। इस वर्ग के लिए बड़े आकार वाले माइक्रोवेव (23-28 लीटर) बाजार में सबसे ज्यादा लोकप्रिय हैं।
जरूरी फीचर
ऑटोमेटिक सेंसर: ऑटोमेटिक सेंसर वाले माइक्रोवेव ओवन खाना पूरी तरह से पकने या गर्म होने के बाद स्वतः बंद हो जाते हैं। यह खाने को अधिक गर्म होने से रोकता है।
कंट्रोल पैनल: मैकेनिकल और टच कंट्रोल पैनल के साथ माइक्रोवेव खरीदना बेहतर होता है। टच कंट्रोल पैनल को सावधानी से संभालना पड़ता है, क्योंकि इसके फेल होने की संभावना होती है।
चाइल्ड सेफ्टी लॉक: यह एक जरूरी फीचर है। माइक्रोवेव ओवन खरीदते समय उन लोगों को इसे ध्यान में रखना चाहिए, जिनके परिवार में छोटे बच्चे हैं। ओवन में इलेक्ट्रिक लॉक सिस्टम ओवन से होने वाली किसी भी प्रकार की दुर्घटना से बचाता है।
पावर रेटिंग
बड़े आकार वाले माइक्रोवेव आमतौर पर 1000-1600 वाट बिजली की खपत करते हैं, जबकि छोटे साइज वाले 800-1000 वाट की खपत करते हैं।
ऑटोमेटिक सेंसर: ऑटोमेटिक सेंसर वाले माइक्रोवेव ओवन खाना पूरी तरह से पकने या गर्म होने के बाद स्वतः बंद हो जाते हैं। यह खाने को अधिक गर्म होने से रोकता है।
कंट्रोल पैनल: मैकेनिकल और टच कंट्रोल पैनल के साथ माइक्रोवेव खरीदना बेहतर होता है। टच कंट्रोल पैनल को सावधानी से संभालना पड़ता है, क्योंकि इसके फेल होने की संभावना होती है।
चाइल्ड सेफ्टी लॉक: यह एक जरूरी फीचर है। माइक्रोवेव ओवन खरीदते समय उन लोगों को इसे ध्यान में रखना चाहिए, जिनके परिवार में छोटे बच्चे हैं। ओवन में इलेक्ट्रिक लॉक सिस्टम ओवन से होने वाली किसी भी प्रकार की दुर्घटना से बचाता है।
पावर रेटिंग
बड़े आकार वाले माइक्रोवेव आमतौर पर 1000-1600 वाट बिजली की खपत करते हैं, जबकि छोटे साइज वाले 800-1000 वाट की खपत करते हैं।
साथ ही खरीदने से पहले यह जरूर सुनिश्चित कर लें कि उस कंपनी का सर्विस सेंटर आपके शहर में है या नहीं।
हम से जुड़े रहने के लिए धन्यवाद्।
Friday, June 8, 2018
स्मार्टफोन सेंसर क्या है, आइए जानते हैं
आजकल स्मार्टफोन्स तरह-तरह के सेंसर्स से लैस आ रहे हैं, जो फोन में मौजूद डाटा की सुरक्षा के साथ-साथ आपको दिशा दिखाने वाले और वीडियो ऐप्स को और अधिक स्मार्ट और आधुनिक बना देते हैं। किसी भी इलेक्ट्रॉनिक प्रोडक्ट में यदि कोई काम अपने आप हो जाता है, तो उसमें सेंसर का हाथ होता है। जब आप अपने मोबाइल फोन से कॉल करने के बाद उसे अपने कान के पास ले जाते हैं, तो उसकी स्क्रीन अपने आप बंद हो जाती है। दरअसल, इसमें भी सेंसर ही काम करता है। हमारे मोबाइल फोन में कई तरह के सेंसर इस्तेमाल होते हैं, जो अलग-अलग काम करते हैं। स्मार्टफोन में लगे कई तरह के सेंसर्स की मदद से विभिन्न प्रकार के ऐप आसानी से काम करते हैं। कुछ महत्वपूर्ण सेंसर हैं, जो लगभग सभी तरह के स्मार्टफोन में इस्तेमाल होते हैं-
स्मार्टफोन सेंसर का मतलब
एक्सीलरोमीटर और जाइरोस्कोप सेंसर- यह सेंसर मुख्य रूप से स्मार्टफोन किस दिशा में घूमा हुआ है, उसके बारे में बताता है। जब भी हम कोई वीडियो स्मार्टफोन में देख रहे होते हैं, तो उसे पोर्ट्रेट मोड की जगह लैंडस्केप मोड में देखना पसंद करते हैं, जिससे कि वीडियो फुल स्क्रीन पर देख सकें। इसके लिए जैसे ही हम स्मार्टफोन को लैंडस्केप मोड में घुमाते हैं, फोन में चल रहे वीडियो का ओरिएंटेशन भी लैंडस्केप हो जाता है। ध्यान रहे, यह सेंसर तभी काम करता है, जब आपने फोन में ऑटो-रोटेशन इनेबल किया हो। इसे एक्सीलरोमीटर और जाइरोस्कोप सेंसर इसलिए कहा जाता है, क्योंकि स्मार्टफोन में रोटेशन के लिए दो सेंसर्स की जरूरत होती है, जिसमें एक्सीलरोमीटर इसके रेखीय त्वरण को और जाइरोस्कोप इसके घूर्णी कोण की गति को निंयत्रित करता है। एक्सीलरोमीटर सेंसर का इस्तेमाल कई स्वास्थ्य संबंधित ऐप्स के लिए भी किया जाता है।
प्रोक्सिमिटी सेंसर- जब कोई वस्तु स्मार्टफोन के समीप होती है, तो यह सेंसर उसकी मौजूदगी का पता लगा लेता है। यह सेंसर मुख्य रूप से स्मार्टफोन के ऊपरी हिस्से में फ्रंट कैमरे के पास लगा होता है। आमतौर पर जब आप कॉल आने या कॉल करने के लिए स्मार्टफोन को कान के पास ले जाते हैं, तो यह सेंसर स्मार्टफोन के डिस्प्ले की लाइट को स्वत: ऑफ कर देता है।
बैरोमीटर- यह सेंसर मूलरूप से स्मार्टफोन में इनबिल्ट जीपीएस चिप की मदद से काम करता है। इसकी मदद से ऊंचाई पर त्वरित गति से स्थान को लॉक करके डाटा इकट्ठा किया जा सकता है।
बायोमैट्रिक सेंसर- इसका इस्तेमाल आजकल लगभग सभी तरह के मिड रेंज और हाई रेंज के स्मार्टफोन्स में किया जा रहा है। इसकी मदद से स्मार्टफोन की सुरक्षा के लिए फिंगरप्रिंट सेंसर इसी सेंसर के जरिए काम करता है। यह सेंसर स्मार्टफोन में दर्ज किए गए अंगूठे या उंगली को स्कैन करके डाटा इकट्ठा कर लेता है। दूसरी बार, उसी अंगूठे या उंगली को इस सेंसर के पास रखा जाता है, तो वह इसकी जानकारी को इकट्ठा की गई जानकारी मे मिलाकर सही अंगूठे या उंगली की पहचान कर लेता है। भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण की वेबसाइट पर आधार के लिए इस्तेमाल में लाए जाने वाले डाटा के लिए बायोमैट्रिक सेंसर्स का इस्तेमाल किया जाता है। बायोमैट्रिक सेंसर में फिंगरप्रिंट के अलावा रेटिना स्कैनर भी आता है, जो फ्रंट कैमरे के साथ जुड़ा होता है। इसकी मदद से स्मार्टफोन के लॉक को रेटिना के स्कैन की मदद से भी लॉक-अनलॉक किया जा सकता है। इसके अलावा, इस सेंसर की मदद से हार्ट रेट को भी मापा जा सकता है, जो कई तरह के हार्ट रेट मापने वाले ऐप के साथ काम करता है।
एंबिएंट लाइट सेंसर- यह सेंसर स्मार्टफोन के डिस्प्ले की ब्राइटनेस को रोशनी के हिसाब से एडजस्ट तो करता ही है साथ ही डिस्प्ले की ब्राइटनेस को स्वत: कम या ज्यादा करने में भी मदद करता है।
वर्चुअल रियलिटी सेंसर- वर्चुअल रियलिटी सेंसर मूलरूप से स्मार्टफोन के कैमरे के साथ मिलकर रियलिटी ऐप्स के साथ काम करता है। यह सेंसर स्मार्टफोन में कैमरा ऐप्स की मदद से एनिमेटेड तस्वीर भी निकाल सकता है, जैसा कि आजकल युवाओं में विभिन्न तरह के एनिमेटेड फेस वाली तस्वीर निकालने का प्रचलन है। यह सेंसर कई तरह के मोबाइल गेम्स खेलने में भी मददगार है।
जीपीएस सेंसर- यह सेंसर आमतौर पर सभी स्मार्टफोन में इस्तेमाल किया जाने वाला सेंसर है। जीपीएस का मतलब होता है, ग्लोबल पोजिशनिंग सिस्टम यानी भूमंडलीय स्थिति निर्धारण प्रणाली। इस सेंसर की मदद से डिवाइस की लोकेशन पता करने में मदद मिलती है। यह सेंसर कई तरह के सैटेलाइट के साथ जुड़कर यह बता सकता है कि आप इस समय कहां हैं? यह सेंसर उस समय काम नहीं करता है, जब आप इनडोर या बेसमेंट में हों या फिर आसमान में घने बादल हों, क्योंकि इसे सैटेलाइट से जुड़ने में ये लेयर्स मुश्किलें पैदा करती हैं। साथ ही जीपीएस सेंसर स्मार्टफोन में इंटरनेट कनेक्टिविटी होने पर ही काम करता है यानी अगर आपके स्मार्टफोन में इंटरनेट डाटा बंद होता है, तो यह सेंसर काम नहीं करेगा। जीपीएस सेंसर इंटरनेट डाटा पर काम करता है। यह स्मार्टफोन की बैटरी को जल्दी डिस्चार्ज कर देता है, लेकिन इस सेंसर की मदद से ही कई तरह के मैप्स आपके स्मार्टफोन में काम करते हैं। अगर आपका स्मार्टफोन कहीं गुम हो जाता है, तो जीपीएस ट्रैकर की मदद से ही आपके स्मार्टफोन को तलाशने में मदद मिलती है।
बायोमैट्रिक सेंसर- इसका इस्तेमाल आजकल लगभग सभी तरह के मिड रेंज और हाई रेंज के स्मार्टफोन्स में किया जा रहा है। इसकी मदद से स्मार्टफोन की सुरक्षा के लिए फिंगरप्रिंट सेंसर इसी सेंसर के जरिए काम करता है। यह सेंसर स्मार्टफोन में दर्ज किए गए अंगूठे या उंगली को स्कैन करके डाटा इकट्ठा कर लेता है। दूसरी बार, उसी अंगूठे या उंगली को इस सेंसर के पास रखा जाता है, तो वह इसकी जानकारी को इकट्ठा की गई जानकारी मे मिलाकर सही अंगूठे या उंगली की पहचान कर लेता है। भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण की वेबसाइट पर आधार के लिए इस्तेमाल में लाए जाने वाले डाटा के लिए बायोमैट्रिक सेंसर्स का इस्तेमाल किया जाता है। बायोमैट्रिक सेंसर में फिंगरप्रिंट के अलावा रेटिना स्कैनर भी आता है, जो फ्रंट कैमरे के साथ जुड़ा होता है। इसकी मदद से स्मार्टफोन के लॉक को रेटिना के स्कैन की मदद से भी लॉक-अनलॉक किया जा सकता है। इसके अलावा, इस सेंसर की मदद से हार्ट रेट को भी मापा जा सकता है, जो कई तरह के हार्ट रेट मापने वाले ऐप के साथ काम करता है।
एंबिएंट लाइट सेंसर- यह सेंसर स्मार्टफोन के डिस्प्ले की ब्राइटनेस को रोशनी के हिसाब से एडजस्ट तो करता ही है साथ ही डिस्प्ले की ब्राइटनेस को स्वत: कम या ज्यादा करने में भी मदद करता है।
वर्चुअल रियलिटी सेंसर- वर्चुअल रियलिटी सेंसर मूलरूप से स्मार्टफोन के कैमरे के साथ मिलकर रियलिटी ऐप्स के साथ काम करता है। यह सेंसर स्मार्टफोन में कैमरा ऐप्स की मदद से एनिमेटेड तस्वीर भी निकाल सकता है, जैसा कि आजकल युवाओं में विभिन्न तरह के एनिमेटेड फेस वाली तस्वीर निकालने का प्रचलन है। यह सेंसर कई तरह के मोबाइल गेम्स खेलने में भी मददगार है।
जीपीएस सेंसर- यह सेंसर आमतौर पर सभी स्मार्टफोन में इस्तेमाल किया जाने वाला सेंसर है। जीपीएस का मतलब होता है, ग्लोबल पोजिशनिंग सिस्टम यानी भूमंडलीय स्थिति निर्धारण प्रणाली। इस सेंसर की मदद से डिवाइस की लोकेशन पता करने में मदद मिलती है। यह सेंसर कई तरह के सैटेलाइट के साथ जुड़कर यह बता सकता है कि आप इस समय कहां हैं? यह सेंसर उस समय काम नहीं करता है, जब आप इनडोर या बेसमेंट में हों या फिर आसमान में घने बादल हों, क्योंकि इसे सैटेलाइट से जुड़ने में ये लेयर्स मुश्किलें पैदा करती हैं। साथ ही जीपीएस सेंसर स्मार्टफोन में इंटरनेट कनेक्टिविटी होने पर ही काम करता है यानी अगर आपके स्मार्टफोन में इंटरनेट डाटा बंद होता है, तो यह सेंसर काम नहीं करेगा। जीपीएस सेंसर इंटरनेट डाटा पर काम करता है। यह स्मार्टफोन की बैटरी को जल्दी डिस्चार्ज कर देता है, लेकिन इस सेंसर की मदद से ही कई तरह के मैप्स आपके स्मार्टफोन में काम करते हैं। अगर आपका स्मार्टफोन कहीं गुम हो जाता है, तो जीपीएस ट्रैकर की मदद से ही आपके स्मार्टफोन को तलाशने में मदद मिलती है।
डिजिटल कम्पास- इसमें मैग्नेटोमीटर सेंसर का इस्तेमाल किया जाता है, जो जमीन के चुंबकीय क्षेत्र के अनुसार काम करता है। इस सेंसर की मदद से स्मार्टफोन में इंस्टॉल डिजिटल कम्पास सही दिशा के बारे में जानकारी देता है।
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वाशिंग मशीन खरीदने जा रहे हैं तो इन बातों को ध्यान से नोट कर लें
वाशिंग मशीन खरीदना है, पहले इन्हें जान लें, फिर खरीदें वाशिंग मशीन। आज लोगों के पास समय की कमी है। लोग इस थोड़े से समय में ही अपने ऑफिस के काम के साथ-साथ घरेलू काम भी करना चाहते हैं, जिसमें कपड़े धोना भी शामिल है। बदलती तकनीक में इसी को देखते हुए वाशिंग मशीन भी अधिक एडवांस्ड आने लगी हैं।
वाशिंग मशीन के प्रकार
वाशिंग मशीनों को फ्रंट लोडिंग और टॉप लोडिंग मशीन के आधार पर वर्गीकृत किया जा सकता है। फ्रंट लोडिंग में कपड़ों को सामने से डाला जाता है, जिन्हें आप देख पाएंगे कि कैसे कपड़े की जबरदस्त धुलाई हो रही है। वहीं, टॉप लोडिंग में कपड़े ऊपर से डाले जाते हैं। फ्रंट लोडिंग वाली वाशिंग मशीन की तुलना में टॉप लोडिंग वाशिंग मशीन सस्ती होती है।
वाशिंग मशीनों को फ्रंट लोडिंग और टॉप लोडिंग मशीन के आधार पर वर्गीकृत किया जा सकता है। फ्रंट लोडिंग में कपड़ों को सामने से डाला जाता है, जिन्हें आप देख पाएंगे कि कैसे कपड़े की जबरदस्त धुलाई हो रही है। वहीं, टॉप लोडिंग में कपड़े ऊपर से डाले जाते हैं। फ्रंट लोडिंग वाली वाशिंग मशीन की तुलना में टॉप लोडिंग वाशिंग मशीन सस्ती होती है।
फुली या सेमी ऑटोमेटिक
तकनीक के आधार पर वाशिंग मशीन दो प्रकार की होती है, फुली ऑटोमेटिक या सेमी ऑटोमेटिक। जब भी आप इसे खरीदें, तो पहले अपनी आवश्यकताओं को समझें, फिर निर्णय लें। फुली ऑटोमेटिक वाशिंग मशीन कपड़े अंदर डालने के बाद स्वतः धोती एवं सुखाती है। लेकिन, सेमी ऑटोमेटिक वाशिंग मशीन में आपको टब में कपड़े निकाल ड्रायर में डालने होते हैं। यह फुली ऑटोमेटिक से सस्ती होती है।
तकनीक के आधार पर वाशिंग मशीन दो प्रकार की होती है, फुली ऑटोमेटिक या सेमी ऑटोमेटिक। जब भी आप इसे खरीदें, तो पहले अपनी आवश्यकताओं को समझें, फिर निर्णय लें। फुली ऑटोमेटिक वाशिंग मशीन कपड़े अंदर डालने के बाद स्वतः धोती एवं सुखाती है। लेकिन, सेमी ऑटोमेटिक वाशिंग मशीन में आपको टब में कपड़े निकाल ड्रायर में डालने होते हैं। यह फुली ऑटोमेटिक से सस्ती होती है।
आरपीएम
वाशिंग मशीन में कपड़े सुखाने के लिए स्पिन चक्र को प्रति मिनट आरपीएम (रिवोल्यूशन पर मिनट) के रूप में मापा जाता है। आरपीएम जितना अधिक होगा, उतनी ही जल्दी यह आपके कपड़े को सुखाएगी। हालांकि, यह कपड़ों के प्रकारों पर निर्भर करेगा। नाजुक कपड़े के लिए, स्पिन चक्र 300-500 आरपीएम है, जबकि जींस के लिए लगभग 1,000 आरपीएम है।
वाशिंग मशीन में कपड़े सुखाने के लिए स्पिन चक्र को प्रति मिनट आरपीएम (रिवोल्यूशन पर मिनट) के रूप में मापा जाता है। आरपीएम जितना अधिक होगा, उतनी ही जल्दी यह आपके कपड़े को सुखाएगी। हालांकि, यह कपड़ों के प्रकारों पर निर्भर करेगा। नाजुक कपड़े के लिए, स्पिन चक्र 300-500 आरपीएम है, जबकि जींस के लिए लगभग 1,000 आरपीएम है।
तापमान कंट्रोल
अगर वाशिंग मशीन में हीटर है, तो यह सुविधा पानी के तापमान को समायोजित करने में मदद करेगी। यह सर्दियों में ज्यादा उपयोगी साबित हो सकता है। इसके अलावा, गर्म पानी से कपड़े बेहतर साफ हो जाते हैं। कुछ मशीनों में भाप की सुविधा होती है, जो गंदगी और दाग से अच्छी तरह लड़ने में मदद करती है।
अगर वाशिंग मशीन में हीटर है, तो यह सुविधा पानी के तापमान को समायोजित करने में मदद करेगी। यह सर्दियों में ज्यादा उपयोगी साबित हो सकता है। इसके अलावा, गर्म पानी से कपड़े बेहतर साफ हो जाते हैं। कुछ मशीनों में भाप की सुविधा होती है, जो गंदगी और दाग से अच्छी तरह लड़ने में मदद करती है।
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Thursday, June 7, 2018
Whatsapp पर बिना ग्रुप बनाए एक से अधिक लोगों को एक साथ मैसेज कैसे करें ?
व्हाट्सऐप दुनिया का सबसे बड़ा मैसेजिंग ऐप है। केवल भारत में ही व्हाट्सऐप के करीब 22 करोड़ यूजर्स हैं। ऐसे में आप भी व्हाट्सऐपयूज करते ही होंगे तो कई बार ऐसी स्थिति आ जाती है कि हम एक साथ कई लोगों को मैसेज करना चाहते हैं लेकिन इसके लिए हमें एक व्हाट्सऐप गुप बनाना पड़ता है और फिर लोगों को उसमें जोड़ना पड़ता है। वैसे आपको बता दें कि आप बिना ग्रुप बनाए भी कई सारे लोगों को व्हाट्सऐप पर एक साथ मैसेज कर सकते हैं। आइए जानते हैं।
दरअसल व्हाट्सऐप में एक ब्रॉडकास्ट का फीचर है जिसकी मदद से आप बिना ग्रुप बनाए एक साथ 256 लोगों को मैसेज कर सकते हैं। कैसे, आइए जनते हैं।
अगर आप एंड्रॉयड फोन यूज करते है तो ब्रॉडकास्ट लिस्ट बनाने के लिए व्हाट्सऐप ऐप को ओपन करेें। अब दाहिनी ओर दिख रहे तीन डॉट पर क्लिक करें। अब आपको New Broadcast का विकल्प मिलेगा।
इसके आप जिन लोगों को एक साथ एक ही मैसेज करना चाहते हैं उनके नाम को सेलेक्ट करें और ब्रॉडकास्ट लिस्ट में जोड़ देंं। अब आपकी लिस्ट तैयार हो गई है। अब ब्रॉडकास्ट लिस्ट में जो भी मैसेज भेजेंगे वह लिस्ट में शामिल सभी लोगों के पास पहुंच जाएगी और बिना ग्रुप बनाए आपका काम हो जाएगा।
ग्रुप बनाने पर कई बार ऐसा होता है कि कुछ लोगों को ग्रुप में जोड़ना उन्हें अच्छा नहीं लगता है। ऐसे में ब्रॉडकास्ट लिस्ट बेहद ही आसान और सटीक तरीका है। साथ ही जिन लोगों के पास आपके मैसेज पहुंचेंगे उन्हें भी पता नहीं चलता है कि आपने और किन-किन लोगोंं को वही मैसेज भेजा है।
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वोटर कार्ड में संशोधन कैसे करें, जानें
देश में होने वाले चुनाव में मतदान करने का हक हर एक उस नागरिक के पास है जिसकी उम्र 18 साल से अधिक है। 18 साल से अधिक उम्र वाले अधिकतर लोगों का मतदाता पहचान पत्र भी बन गया होगा लेकिन वोटर कार्ड में गलतियों का होना आम बात है।
आप घर बैठे मोबाइल से अपने वोटर कार्ड में सुधार कर सकते हैं। आइए जानते हैं।
सबसे पहले राष्ट्रीय मतदाता सेवा पोर्टल की वेबसाइट (http://www.nvsp.in/) पर जाएं। अब आपको नीचे स्क्रॉल करने पर Correction of entries in electoral roll नाम से एक बटन मिलेगा। उस पर क्लिक करें।
अब आपके सामने फॉर्म 8 खुलकर आ जाएगा। इसमें नाम, विधान सभा/संसदीय निर्वाचन क्षेत्र, राज्य समेत कई जानकारियों को भरना होगा। अब आपको सबसे नीचे भेजें का विकल्प मिलेगा।
फॉर्म सबमिट करने के बाद आपको एक ई-मेल मिलेगा जिसमें एप्लिकेशन आईडी मिलेगी। इस आईडी से आप यहां क्लिक करके ट्रैक कर सकते हैं कि आपको वोटर कार्ड में सुधार हुआ या नहीं। अप्लाई करने के 30 दिन के भीतर आपको नया वोटर कार्ड मिल जाएगा।
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Wednesday, June 6, 2018
ऑनलाइन देखें आधार कार्ड में अब तक हुए संशोधन की हिस्ट्री
भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (यूआईडीएआई) ने आधार कार्डधारकों के लिए आधार की अपडेट हिस्ट्री ऑनलाइन देखने की सुविधा शुरू की है। हालांकि इसे अभी बीटा वर्जन पर लांच किया गया है। इस सुविधा का लाभ उठाने के लिए आधार कार्डधारक को यूआईडीएआई की वेबसाइट पर जाकर आधार अपडेट हिस्ट्री पर क्लिक करना होगा। इसके बाद एक सेक्शन खुलेगा। यहां आधार नंबर या वर्चुअल आईडी और सिक्योरिटी कैप्चा भरना होगा। इसके बाद कार्डधारक के पास एक ओटीपी आएगा जिसे वेबसाइट पर प्रदर्शित एक बॉक्स में भरना होगा। इसके बाद वह हिस्ट्री को देख सकेगा।
आधार अपडेट हिस्ट्री आधार कार्ड के बनने के बाद से पता समेत अन्य सभी हिस्सों में हुए अपडेट की तिथिवार जानकारी देगा।
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Tuesday, June 5, 2018
आधार कार्ड में मोबाइल से संशोधन कैसे करें
आधार सभी जगह मान्य ना होने के बावजूद भी अब हमारी आइडेंटिटी का बड़ा हिस्सा बन गया है| ऐसे में अगर आपको आधार में कुछ संसोधन करना है तो कुछ बदलाव मोबाइल से ऑनलाइन भी किये जा सकते हैं|
आधार डिटेल्स को ऑनलाइन किस तरह करें संशोधन-
1- UIDAI वेबसाइट पर उपलब्ध एक लिंक के जरिये आप आधार डिटेल्स अपडेट कर सकते हैं। आप UIDAI की वेबसाइट uidai.gov.in पर आ जाएं और पेज पर नीचे की ओर अपडेट आधार डिटेल्स (ऑनलाइन) लिंक पर क्लिक करें।
1- UIDAI वेबसाइट पर उपलब्ध एक लिंक के जरिये आप आधार डिटेल्स अपडेट कर सकते हैं। आप UIDAI की वेबसाइट uidai.gov.in पर आ जाएं और पेज पर नीचे की ओर अपडेट आधार डिटेल्स (ऑनलाइन) लिंक पर क्लिक करें।
2- अगले पृष्ठ पर पेज में नीचे की ओर लिंक पर क्लिक कर रिक्वेस्ट सबमिट करें।
3- जब आप UIDAI के सेल्फ सर्विस टूल पर पहुंच जाएं, तब अपना आधार नंबर और टेक्स्ट वेरिफिकेशन कोड डाल दें। इस स्टेप के बाद, आपके रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर पर वन टाइम पासवर्ड (OTP) आएगा। UIDAI की वेबसाइट के अनुसार पासवर्ड या लॉगइन रिसीव करने के लिए मोबाइल नंबर होना अनिवार्य है।
4- मांगी गई सभी जानकारी भर के अगले स्टेप पर बढ़ें।
5- जो भी जानकारी आप अपडेट करना चाहते हैं उन्हें सेलेक्ट कर के सबमिट पर क्लिक करें। आप नाम, लिंग, जन्म तिथि, पता, मोबाइल नंबर ओर ईमेल में से चुनाव कर सकते हैं। अन्य अपडेट के
लिए आपको अपडेट सेंटर जाना होगा।
6- अपडेट की गई जानकारी भरें ओर सबमिट अपडेट रिक्वेस्ट पर क्लिक कर दें।इस बात पर ध्यान दें की आपके द्वारा भरी गई जानकारी लोकल भाषा में सही से बदल गई है।
7-अगर किसी जानकारी के लिए प्रूफ के तौर पर डाक्यूमेंट्स की जरुरत है, तो यूजर्स डॉक्यूमेंट स्कैन कर के उपलोड कर सकते हैं।डाक्यूमेंट्स की सेल्फ-अटेस्टेड कॉपी अपलोड कर सकते हैं
8- UIDAI का ऑनलाइन अपडेशन टूल आपके द्वारा दी गई जानकारी को वेरीफाई करता है। अपनी एंट्री को चेक कर लें। अगर बदलाव करना चाहते हैं तो मॉडिफाई पर क्लिक कर के आगे स्टेप्स फॉलो करें। अगर सब ठीक है तो घोषणा चेकबॉक्स पर क्लिक कर आगे बढ़ें।
UADAI पोर्टल पर रजिस्टर्ड यूजर्स अपने ईमेल आईडी और पासवर्ड का इस्तेमाल कर के भी अपडेट रिक्वेस्ट कर सकते हैं।
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Li-Fi तकनीक में LED बल्ब से चलता है इंटरनेट, Wi-Fi से भी तेज काम करता है
Li-Fi का पूरा फुल फॉर्म है Light Fidelity। यह वायरलेस कम्युनिकेशन पर काम करने वाली एक तकनीक है, जहां डिवाइस डाटा ट्रांसमिट के लिए प्रकाश(लाइट) का इस्तेमाल करता है।इंटरनेट के इस युग में यह तकनीक किसी क्रांति से कम नहीं है। मौजूदा समय में सिग्नल लेने और भेजने के लिए रेडियो सिग्नल्स का इस्तेमाल होता है लेकिन Li-Wi तकनीक में सिग्नल लेने और भेजने के लिए प्रकाश का इस्तेमाल होता है।
Li-Wi तकनीक कैसे काम करती है?
Li-Wi तकनीक में सिग्नल भेजने और रिसीव करने के लिए प्रकाश का इस्तेमाल किया जाता है। दरअसल एलईडी लाइट सिग्नल भेजने के लिए एक सेकेंड्स में लाखों बार टिमटिमाती है, जिसे हम अपनी खुली आंखों से नहीं देख पाते हैं और हमें लगता है कि बल्ब लगातार जल रहा है।
Li-Fi की खासियत
- Li-Wi तकनीक की कई खासियतों में से एक यह भी है कोई भी आपके इंटरनेट का इस्तेमाल नहीं कर सकता है जब तक आप न चाहें। ऐसा इसलिए क्योंकि इंटरनेट सिग्नल उसी जगह पर आता है जहां आपने लाइट को लगाया हो।
- Li-Wi की दूसरी खासियतों में से एक इसका Wi-Fi की तुलना में कई गुना तेज काम करना शामिल है। आपको सिग्नल के लिए Li-Fi डॉन्गल लगाना होगा।
- Wi-Fi तकनीक रेडियो सिग्नल पर काम करता है, Li-Fi पर्यावरण की नजर से काफी सुरक्षित तकनीक है। इसलिए इसे ग्रीन तकनीक भी कहा जा सकता है।
हमसे जुड़े रहने के लिए धन्यवाद।
प्रधानमंत्री आवास योजना : सम्पूर्ण जानकारी
योजना-
इस योजना के तहत सरकार आपको घर खरीदने, मौजूदा घर को रेनोवेट करने अथवा उसमें नये कमरे जोड़ने के लिए सहयोग मुहैया करती है. इसके अलावा पुराना मकान खरीदने के लिए भी सरकार सहयोग देती है।
कौन कौन उठा सकते हैं फायदा-
इस योजना का लाभ आप दो श्रेणियों के जरिये ले सकते हैं। इसमें 'अदर थ्री कॉम्पोनेंट्स' और 'स्लम ड्वैलर्स' शामिल है। पहली वाली श्रेणी में, तीन उप-श्रेणियां हैं ।'स्लम ड्वैलर्स' में वे लोग शामिल हैं, जो किसी बस्ती में कच्चे मकानों में रहते हैं।
इस योजना का लाभ आप दो श्रेणियों के जरिये ले सकते हैं। इसमें 'अदर थ्री कॉम्पोनेंट्स' और 'स्लम ड्वैलर्स' शामिल है। पहली वाली श्रेणी में, तीन उप-श्रेणियां हैं ।'स्लम ड्वैलर्स' में वे लोग शामिल हैं, जो किसी बस्ती में कच्चे मकानों में रहते हैं।
तीनो श्रेणियां-
इस के तहत तीन उप-श्रेणी हैं। पहली, आर्थिक तौर पर कमजोर समूह (EWS) है. इनमें से वही लाभ ले सकते हैं, जिनकी सालाना आय 3 लाख रुपये तक है। दूसरी, कम आय वाले समूह (LIGs). जिनकी सालाना आय 3 लाख से 6 लाख के बीच है। तीसरी, मध्य आय समूह (MIGs). इस श्रेणी में अगर आपकी आय 6 लाख से 18 लाख के बीच है, तो इस योजना में अप्लाई कर सकते हैं। MIGs योजना के तहत क्रेडिट लिंक्ड सब्सिडी स्कीम (CLSS) का फायदा उठा सकते हैं।
ये है पहली शर्त-
इसके लिए जरूरी है कि आपके और आपके परिवार के सदस्यों (पत्नी, पति,अविवाहित बेटे-बेटी) के पास पहले से ही पक्का मकान न हो।हालांकि कमाई करने वाला विवाहित या अविवाहित वयस्क इस योजना का लाभ ले सकता है। यानी पक्के मकाने वाले माता-पिता का कमाऊ बेटा व बेटी इस योजना का लाभ अलग से ले सकते हैं। हालांकि उनके नाम पर कोई घर नहीं होना चाहिए।
इसके लिए जरूरी है कि आपके और आपके परिवार के सदस्यों (पत्नी, पति,अविवाहित बेटे-बेटी) के पास पहले से ही पक्का मकान न हो।हालांकि कमाई करने वाला विवाहित या अविवाहित वयस्क इस योजना का लाभ ले सकता है। यानी पक्के मकाने वाले माता-पिता का कमाऊ बेटा व बेटी इस योजना का लाभ अलग से ले सकते हैं। हालांकि उनके नाम पर कोई घर नहीं होना चाहिए।
मध्य वर्ग के लिए-
अगर आप क्रेडिट लिंक्ड सिक्योरिटी स्कीम (CLSS) के तहत लोन पर सब्सिडी लेना चाहते हैं, तो इसके लिए दरें तय है। 6 से 12 लाख सालाना आमदनी वालों को 9 लाख रुपये तक के लोन के ब्याज पर 4% की सब्सिडी मिलेगी। वहीं, 12 से 18 लाख रुपये की सालाना आमदनी है, तो 12 लाख तक के लोन के ब्याज पर 3% की सब्सिडी मिलेगी। अगर आप इस तय रकम से ज्यादा लोन लेते हैं, तो ऐसी स्थिति में एक्स्ट्रा अमाउंट पर आपको बैंक की तय ब्याज दर ही चुकानी पड़ेगी।
अगर आप क्रेडिट लिंक्ड सिक्योरिटी स्कीम (CLSS) के तहत लोन पर सब्सिडी लेना चाहते हैं, तो इसके लिए दरें तय है। 6 से 12 लाख सालाना आमदनी वालों को 9 लाख रुपये तक के लोन के ब्याज पर 4% की सब्सिडी मिलेगी। वहीं, 12 से 18 लाख रुपये की सालाना आमदनी है, तो 12 लाख तक के लोन के ब्याज पर 3% की सब्सिडी मिलेगी। अगर आप इस तय रकम से ज्यादा लोन लेते हैं, तो ऐसी स्थिति में एक्स्ट्रा अमाउंट पर आपको बैंक की तय ब्याज दर ही चुकानी पड़ेगी।
ऐसे मिलेगी सब्सिडी -
मान लीजिए आपके 12 लाख रुपये के लोन पर ब्याज का 3 फीसदी 2.30 लाख रुपये आ रहा है।ऐसे इस रकम को घटा दिया जाएगा और बकाया रकम पर बैंक की ओर से तय ब्याज दर के हिसाब से आपको किश्तें भरनी होंगी।12 लाख में से 2.30 लाख घटाने के बाद 9.7 लाख रुपये आते हैं।इस पर आपको 9 फीसदी ब्याज दर चुकानी पड़ेगी इससे आपकी किश्तें कम हो जाएंगी।सरकार हर महीने आपके लोन अकाउंट में सब्सिडी की रकम क्रेडिट कर देगी।
मान लीजिए आपके 12 लाख रुपये के लोन पर ब्याज का 3 फीसदी 2.30 लाख रुपये आ रहा है।ऐसे इस रकम को घटा दिया जाएगा और बकाया रकम पर बैंक की ओर से तय ब्याज दर के हिसाब से आपको किश्तें भरनी होंगी।12 लाख में से 2.30 लाख घटाने के बाद 9.7 लाख रुपये आते हैं।इस पर आपको 9 फीसदी ब्याज दर चुकानी पड़ेगी इससे आपकी किश्तें कम हो जाएंगी।सरकार हर महीने आपके लोन अकाउंट में सब्सिडी की रकम क्रेडिट कर देगी।
कैसे करें अप्लाई-
इस योजना का लाभ उठाने के लिए आप https://pmaymis.gov.in/# पर पहुंचकर ऑनलाइन अप्लाई कर सकते हैं। इसके अलावा आप कमर्शियल बैंकों, हाउसिं फाइनेंस कंपनी, क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक और शहरी सहकारी बैंकों समेत अन्य में जाकर इस स्कीम के तहत ब्याज दर सब्सिडी का फायदा उठा सकते हैं। इसके अलावा कॉमन सर्विस सेंटर्स में पहुंचकर भी आप इसके लिए अप्लाई कर सकते हैं।
इस योजना का लाभ उठाने के लिए आप https://pmaymis.gov.in/# पर पहुंचकर ऑनलाइन अप्लाई कर सकते हैं। इसके अलावा आप कमर्शियल बैंकों, हाउसिं फाइनेंस कंपनी, क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक और शहरी सहकारी बैंकों समेत अन्य में जाकर इस स्कीम के तहत ब्याज दर सब्सिडी का फायदा उठा सकते हैं। इसके अलावा कॉमन सर्विस सेंटर्स में पहुंचकर भी आप इसके लिए अप्लाई कर सकते हैं।
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फ्रिज खरीदने जा रहे हैं तो भूलकर भी ऐसी गलती ना करें
गर्मी में आप फ्रिज खरीदने की योजना बना रहे हैं तो कुछ खास बातों का ध्यान रखना आवश्यक है। उपभोक्ताओं की जरूरत के अनुरूप बाजार में विभिन्न ब्रांड में विभिन्न फीचर्स और आकार में फ्रिज उपलब्ध हैं।
आजकल बाजार में सिंगल डोर फ्रिज, डबल डोर, वॉर्डरोब लुक रेफ्रिजरेटर, टॉप फ्रीजर, बॉटम फ्रीजर, साइड बाय साइड फ्रीजर और बिल्ट इन फ्रीजर जैसे फीचर्स वाले कई फ्रिज उपलब्ध हैं।
स्पेस के अनुसार
बड़े शहरों में फ्लैट सिस्टम का चलन है, जिनमें जगह की कमी को ध्यान में रखते हुए आप इस तरह के फ्रिज का चुनाव करें, जो घर के दरवाजे से आराम से अंदर आ जाए और सेट भी हो जाए। इसके अलावा रोजाना उसे बंद करने में दिक्कत भी न हो। छोटे घरों के लिए कॉम्पेक्ट डिजाइन मल्टी फ्रीजर फ्रिज भी उपलब्ध हैं, क्योंकि छोटे घरों में बड़े फ्रिज रखने में काफी दिक्कत होती है।
बड़े शहरों में फ्लैट सिस्टम का चलन है, जिनमें जगह की कमी को ध्यान में रखते हुए आप इस तरह के फ्रिज का चुनाव करें, जो घर के दरवाजे से आराम से अंदर आ जाए और सेट भी हो जाए। इसके अलावा रोजाना उसे बंद करने में दिक्कत भी न हो। छोटे घरों के लिए कॉम्पेक्ट डिजाइन मल्टी फ्रीजर फ्रिज भी उपलब्ध हैं, क्योंकि छोटे घरों में बड़े फ्रिज रखने में काफी दिक्कत होती है।
स्टार रेटिंग का ध्यान
फ्रिज एक ऐसा उपकरण है, जो ज्यादातर घरों में 24 घंटे और 365 दिन चलता है, इसलिए इसमें बिजली भी काफी खर्च होती है। बाजार में फ्रिज में आपको एनर्जी सेविंग मॉडल्स भी मिलेंगे, जिसमें बिजली की खपत कम होती है। इसका पता स्टार रेटिंग से होता है, ज्यादा रेटिंग वाले फ्रिज में बिजली की खपत भी कम होती है। जितने समय में एक स्टार रेटिंग वाला फ्रिज 100 रुपये की बिजली खपत करेगा, उतने ही समय चलने में 5 स्टार रेटिंग का फ्रिज करीब 69 रुपये की बिजली की खपत करता है। लंबे समय को मद्देनजर रखते हुए 5 स्टार फ्रिज ही फायदेमंद रहेगा। बाजार में अब इन्वर्टर तकनीक पर आधारित फ्रिज भी आ गए हैं, जो 5 स्टार रेटिंग वाले सामान्य फ्रिज के मुकाबले 20 से 30 फीसदी ज्यादा एनर्जी सेविंग करते हैं। कीमत में यह फ्रिज सामान्य फ्रिज के मुकाबले थोड़े मंहगे होते हैं।
फ्रिज एक ऐसा उपकरण है, जो ज्यादातर घरों में 24 घंटे और 365 दिन चलता है, इसलिए इसमें बिजली भी काफी खर्च होती है। बाजार में फ्रिज में आपको एनर्जी सेविंग मॉडल्स भी मिलेंगे, जिसमें बिजली की खपत कम होती है। इसका पता स्टार रेटिंग से होता है, ज्यादा रेटिंग वाले फ्रिज में बिजली की खपत भी कम होती है। जितने समय में एक स्टार रेटिंग वाला फ्रिज 100 रुपये की बिजली खपत करेगा, उतने ही समय चलने में 5 स्टार रेटिंग का फ्रिज करीब 69 रुपये की बिजली की खपत करता है। लंबे समय को मद्देनजर रखते हुए 5 स्टार फ्रिज ही फायदेमंद रहेगा। बाजार में अब इन्वर्टर तकनीक पर आधारित फ्रिज भी आ गए हैं, जो 5 स्टार रेटिंग वाले सामान्य फ्रिज के मुकाबले 20 से 30 फीसदी ज्यादा एनर्जी सेविंग करते हैं। कीमत में यह फ्रिज सामान्य फ्रिज के मुकाबले थोड़े मंहगे होते हैं।
स्टाइल एवं डिजाइंस
फ्रिज की दुनिया में अब डिजाइन और स्टाइल की रेंज में भी कोई कमी नहीं है। किचन को मॉडयुलर लुक देने के लिए रेफ्रिजरेटर में अनूठे डिजाइंस मिलेंगे। नॉर्मल रेंज में फ्रिज को डिजाइनर लुक देने के लिए आजकल कई ब्रांड फ्लोरल प्रिंट्स उपलब्ध करवा कर रहे हैं, जो देखने में स्टाइलिश लगते हैं। यह प्रिंट सिंगल डोर और डबल डोर दोनों में उपलब्ध हैं।
फ्रिज की दुनिया में अब डिजाइन और स्टाइल की रेंज में भी कोई कमी नहीं है। किचन को मॉडयुलर लुक देने के लिए रेफ्रिजरेटर में अनूठे डिजाइंस मिलेंगे। नॉर्मल रेंज में फ्रिज को डिजाइनर लुक देने के लिए आजकल कई ब्रांड फ्लोरल प्रिंट्स उपलब्ध करवा कर रहे हैं, जो देखने में स्टाइलिश लगते हैं। यह प्रिंट सिंगल डोर और डबल डोर दोनों में उपलब्ध हैं।
वैरायटी के आधार पर
वैरायटी में सिंगल डोर, डबल डोर, साइड बाय साइड फ्रिज काउंटर डैप्थ फ्रिज, टॉप-फ्रीजर एंड बॉटम-फ्रीजर फ्रिज और फ्रीजरलेस फ्रिज आदि उपलब्ध है। इन सभी के डिजाइन, लुक, स्पेस और फीचर्स में भी अंतर होता है। साथ ही कई फ्रिज एंटी-बैक्टीरियल एयरटाइट गैस्केट के साथ भी आ रहे हैं, जिनमें बाहरी कीटाणु व बैक्टीरिया फ्रिज के अंदर रखा खाना प्रभावित नहीं कर पाते हैं।
फ्रिज की क्षमता
छोटे परिवार यानी तीन से चार सदस्यों के लिए 190 से 250 लीटर तक की क्षमता वाला फ्रिज सही रहता है। अगर परिवार बड़ा है, तो आप अपने परिवार के सदस्यों की संख्या और जरूरत के अनुरूप ही इसकी क्षमता का चुनाव करें। जरूरी फीचर्स फ्रिज का चुनाव करते समय उसकी क्षमता, कम्प्रेसर, कूलिंग सिस्टम, एयर फिल्टरेशन सिस्टम, डी-फ्रॉस्ट फीचर और वारंटी आदि पर ध्यान दें। इसके पश्चात ही आप फ्रिज खरीदेंगे, तो आपको इसका अच्छा परिणाम मिलेगा।
छोटे परिवार यानी तीन से चार सदस्यों के लिए 190 से 250 लीटर तक की क्षमता वाला फ्रिज सही रहता है। अगर परिवार बड़ा है, तो आप अपने परिवार के सदस्यों की संख्या और जरूरत के अनुरूप ही इसकी क्षमता का चुनाव करें। जरूरी फीचर्स फ्रिज का चुनाव करते समय उसकी क्षमता, कम्प्रेसर, कूलिंग सिस्टम, एयर फिल्टरेशन सिस्टम, डी-फ्रॉस्ट फीचर और वारंटी आदि पर ध्यान दें। इसके पश्चात ही आप फ्रिज खरीदेंगे, तो आपको इसका अच्छा परिणाम मिलेगा।
हमसे जुड़े रहने के लिए धन्यवाद।
वोटर लिस्ट में आपका नाम है या नहीं, मोबाइल से ऐसे पता करें
अगर वोटर लिस्ट में आपका नाम नहीं है तो आप वोट नहीं दे सकते है। कई बार ऐसा भी होता है कि पिछले चुनाव के दौरान वोटर लिस्ट में आपका नाम था लेकिन आने वाले चुनाव में आपको पता चलता है कि नाम कट गया है। वैसे 2019 में लोकसभा चुनाव भी होने वाला है तो चलिए आज हम आपको एक तरीका बताते हैं जिससे आप घर बैठे मोबाइल पर चेक कर सकते हैं कि वोटर लिस्ट में आपका नाम है या नहीं
अपने फोन के ब्राउजर में www.nvsp.in टाइप करके ओके कर दें। अब आपके सामने राष्ट्रीय मतदाता सेवा पोर्टल खुल जाएगा।
बायीं ओर सर्च बॉक्स दिखेगा, उस पर क्लिक करते ही एक नया पेज खुलेगा जिसका यूआरएल http://electoralsearch.in होगा। अब यहां से आप दो तरीकों से अपना नाम वोटर लिस्ट में चेक कर सकते हैं
पहला तरीका
पहला तरीके में आप नाम, पिता या पति का नाम, उम्र, राज्य, लिंग, जिला, विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र का नाम डालकर अपना नाम पता कर सकते हैं।
दूसरा तरीका
दूसरा तरीका यह है कि मतदाता पहचान-पत्र क्रमांक संख्या से सर्च करें। इसके लिए आपको इसी पेज पर विक्लप मिल जाएगा।
वहीं बिहार, आंधप्रदेश और तमिलनाडु के लोग मैसेज भेजकर भी चेक सकते हैं। इसके लिए ELE 10 digit लिखकर 56677 भेज दें। उदाहरण के लिए ELE TDA1234567 लिखें और 56677 पर भेज दें। मैसेज भेजने पर 3 रुपये कटेंगे।
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मोबाईल से फोटो खीचकर पैसे कमाएं
आज कल तो स्मार्टफोन भी शानदार कैमरे के साथ लॉन्च हो रहे हैं। कुछ नए स्मार्टफोन बाजार में आए हैं जिनकी मदद से आप अच्छी फोटोग्राफी कर सकते हैं और उन फोटोज से पैसे भी कमा सकते हैं। एक फोटो के लिए आपको कम-से-कम 20 रुपये मिल जाएंगे। तो आप फोटो को कहां बेचकर पैसे कमा सकते हैं?
आइए जानते है
123RF - सबसे पहले 123RF पर अपना अकाउंट बनाएं और फोटो अपलोड कर दें। यह वेबसाइट आपकी फोटो से हुई कमाई का 60% हिस्सा आपको देती है।
StockFood – अगर आप खाने की फोटोग्राफी करते हैं तो यह वेबसाइट आपके लिए है। इस वेबसाइट पर फूड की फोटो और वीडियो अपलोड कर सकते हैं।
Alamy – यह वेबसाइट आपके फोटो के बदले आपको 50 प्रतिशत तक का हिस्सा देती है, हालांकि यह पैसा आपको तभी मिलेगा जब आपके फोटो को कोई डाउनलोड करेगा।
CrowdFoto – यह वेबसाइट आपको एक असाइनमेंट देगी जिसके मुताबिक आपको फोटोग्राफी करके फोटो अपलोड करना होगा। अगर आपके द्वारा अपलोड किए गए फोटो को कोई खरीदता है तो आपको PayPal के जरिए €20 यानी 1,600 रुपये तक मिल जाएंगे। हालांकि यह वेबसाइट अभी फोटो एसेप्ट नहीं कर रही है। जल्द ही इसकी सर्विस शुरू होगी।
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