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Monday, June 25, 2018

इन 5 तरीकों से स्मार्टफोन की बैटरी लाइफ बढ़ा सकते हैं

कितने भी MAH की बैटरी स्मार्टफोन में क्यों ना लगी हो लेकिन स्मार्ट फोन में बैटरी की समस्या बनी ही रहती है। कई लोग तो दिनभर पावर बैंक लेकर घूमते रहते हैं लेकिन आप कुछ तरीकों से अपने स्मार्टफोन की बैटरी को 40% तक बचा सकते हैं। आइए जानते हैं।

Airplane mode-

एयरप्लेन मोड के बारे में तो आप लोग जानते ही होंगे, इसमें आपकी फोन की बैटरी बचती है। इसके ऑन करने के दौरान ना तो आप फोन कर पाएंगे, ना ही फोन रिसीव कर पाएंगे। विमान में यात्रा करते समय आप इसका इस्तेमाल कर सकते हैं। एयरप्लेन मोड में सिर्फ 5 फ़ीसदी बैटरी खपत होती है।

Wi-Fi

अगर आपके आस पास वाईफाई है, तो मोबाइल के इंटरनेट का इस्तेमाल ना करें, क्योंकि मोबाइल नेटवर्क पर वाई-फाई के मुकाबले ज्यादा बैटरी खर्चा होती है। 4जी की तुलना में वाई फाई के इस्तेमाल पर 40 फ़ीसदी बैटरी कम खर्च होती है।

फोन को गर्म ना होने दें।

फोन को हमेशा धूप से बचा कर रखें, क्योंकि फोन जितना गर्म होगा बैटरी उतनी ही तेजी से खत्म होगी।

बैटरी को 100 फ़ीसदी चार्ज ना करे।

बैटरी को 80 परसेंट चार्ज होते ही फोन को चार्जिंग से निकाल दें और ख्याल रखें कि फोन की बैटरी 0% भी ना हो जाए। अगर फोन इस्तेमाल नहीं भी करना है, तो चार्ज करके ही रखें।

सोशल मीडिया पर ऑटो प्ले वीडियो बंद रखें।

Facebook, Twitter और Google Chrome में ऑटो प्ले वीडियो का ऑप्शन आता है, उसे हमेशा बंद रखें, क्योंकि इनके कारण बैटरी बहुत ज्यादा खपत होती है। इसके अलावा फोन को बार बार चार्ज में ना लगाएं और चार्जिंग के दौरान फोन पर बात ना करें।
इन तरीकों को अपनाकर आपके स्मार्टफोन की बैटरी लाइफ को और बढ़ा सकते हैं, तो देर किस बात की आज ही इन तरीकों का प्रयोग करें।

हमसे जुड़ने के लिए धन्यवाद।

Wednesday, June 13, 2018

धीरे चलने वाले स्मार्टफोन को इन तरीकों से बनाएं सुपरफास्ट

होमस्क्रीन को साफ रखें-

कई लोग ऐसे होते हैं जो इस स्मार्टफोन की होम स्क्रीन पर बहुत सारे ऐप्स रखते हैं जो कि फोन कि धीमाजोकि फोन के धीमा होने का सबसे बड़ा कारण है ऐसे में फोन की होम स्क्रीन पर मौसम, लाइव वॉलपेपर जैसे एप्प के आइकन है तो उन्हें हटा दें।

ऑटो सिंक -

आजकल स्मार्ट फोन में ऑटो सिंक ऑन ही रहता है जिससे फोन के डाटा का बैकअप बैकग्राउंड में ही चलता रहता है। ऑटो सिंक को बंद कर दें आपका फोन पहले के मुकाबले तेज चलने लगेगा।

डाटा सेवर मोड को ऑन करें-

Google Chrome में डाटा सेवर मोड ऑन करने का फायदा होता है कि आप कोई भी साइट ओपन करते हैं तो उस साइट पर मौजूद वीडियो और फोटो की क्वालिटी थोड़ी कमजोर हो जाती है। ऐसे में हैवी पेज आसानी से लोड हो जाते हैं। जिससे आपका स्मार्टफोन तेज चलने लगता है।

कैशे मेमोरी क्लियर करें-

कुछ देर फोन को इस्तेमाल करने पर स्टोरेज में कैशे मेमोरी बनती है जो आपके स्मार्टफोन के स्टोरेज को घेरती है और ऐसे में आपका स्मार्ट फोन स्लो हो जाता है। कैशे मेमोरी क्लियर करने के लिए फोन की सेटिंग में जाकर स्टोरेज ओपन कर कैशे मेमोरी क्लियर कर दें।

स्मार्टफोन के ऑपरेटिंग सिस्टम को अपडेट रखें-

कई कंपनियां समय-समय पर स्मार्टफोन के लिए अपडेट जारी करते हैं ऐसे में अपना स्मार्टफोन जरूर अपडेट करें। इसके लिए सेटिंग में जाकर अबाउट ओपन कर अपडेट चेक कर सकते हैं।

कोई उपाय काम ना करे तो रिसेट करें-

अगर सारे उपाय करने के बाद भी आपका फोन स्लो चल रहा है तो डाटा का बैकअपडाटा का बैकअप लेने के बाद फोन को फैक्ट्री रिसेट करें। रिसेट करने के बाद फोन एकदम नया जैसा हो जाएगा।

हमसे जुड़े रहने के लिए धन्यवाद।

Sunday, June 10, 2018

एंड्रॉयड फोन इस्तेमाल करते हैं तो ये 5 सेटिंग्स आपको पता होने चाहिए

मैग्निफिकेशन गेस्चर -
इस फीचर को ऑन करने के बाद किसी भी वक्त डिस्प्ले पर लगातार तीन बार टैप करने पर डिस्प्ले पर दिखने वाला कोई भी कंटेंट जूम हो जाएगा और उसके बाद आप उसे ड्रैग करके पूरा कंटेंट पढ़ सकेंगे। वहीं फिर से लगातार तीन बार टैप करने पर आप जूम मोड से बाहर आ जाएंगे। इस फीचर को आप सेटिंग्स में एक्सेसिबलिटी में जाकर ऑन कर सकते हैं।
टेक्स्ट टू स्पीच-
इस फीचर को ऑन करने के बाद आप अपने फोन दिखने वाले किसी भी कंटेंट को सुन सकते हैं। दरअसल इस फीचर के जरिए एंड्रॉयड फोन आपके फोन की डिस्प्ले पर दिखने वाले टेक्स्ट को ऑडियो में कन्वर्ट कर देता है। उदाहरण के तौर पर अगर आप किसी काम में व्यस्त हैं और किसी न्यूज को पढ़ना चाहते हैं तो यह फीचर उस न्यूज को आपको पढ़कर सुना सकता है। इस फीचर को आप सेटिंग्स में एक्सेसिबलिटी में जाकर ऑन कर सकते हैं।

इन्वर्ट कलर-
इस फीचर को भी आप सेटिंग्स में एक्सेसिबलिटी में जाकर ऑन कर सकते हैं। इसकी मदद से आप फोन का डिफॉल्ट बैकग्राउंड कलर बदल जाएगा।

टॉकबैक-
अगर आपकी आंखें कमजोर हैं या चश्मा घर पर भूल गए हैं तो यह फीचर आपके लिए काफी मददगार साबितो होगा। एंड्रॉयड फोन में टॉकबैक फीचर को ऑन करने के बाद आप फोन में जब टच करेंगे तो फोन आपको बताएगा कि आप क्या टच कर रहे हैं और किस ऐप पर टच कर रहे हैं। इस फीचर को आप सेटिंग्स में एक्सेसिबलिटी में जाकर ऑन कर सकते हैं।

इंटरेक्शन कंट्रोल-
इस फीचर की मदद से आप फोन के किसी खास टच हिस्से को ब्लॉक कर सकते हैं। यानि अगर आप चाहते हैं तो नोटिफिकेशन बार पर टच फीचर काम ना करे तो इस फीचर को ऑन कर सकते हैं।

हम से जुड़े रहने के लिए धन्यवाद्।



Friday, June 8, 2018

स्मार्टफोन सेंसर क्या है, आइए जानते हैं

आजकल स्मार्टफोन्स तरह-तरह के सेंसर्स से लैस आ रहे हैं, जो फोन में मौजूद डाटा की सुरक्षा के साथ-साथ आपको दिशा दिखाने वाले और वीडियो ऐप्स को और अधिक स्मार्ट और आधुनिक बना देते हैं। किसी भी इलेक्ट्रॉनिक प्रोडक्ट में यदि  कोई काम अपने आप हो जाता है, तो उसमें सेंसर का हाथ होता है। जब आप अपने मोबाइल फोन से कॉल करने के बाद उसे अपने कान के पास ले जाते हैं, तो उसकी स्क्रीन अपने आप बंद हो जाती है। दरअसल, इसमें भी सेंसर ही काम करता है। हमारे मोबाइल फोन में कई तरह के सेंसर इस्तेमाल होते हैं, जो अलग-अलग काम करते हैं। स्मार्टफोन में लगे कई तरह के सेंसर्स की मदद से विभिन्न प्रकार के ऐप आसानी से काम करते हैं। कुछ महत्वपूर्ण सेंसर हैं, जो लगभग सभी तरह के स्मार्टफोन में इस्तेमाल होते हैं-

                   स्मार्टफोन सेंसर का मतलब

एक्सीलरोमीटर और जाइरोस्कोप सेंसर- यह सेंसर मुख्य रूप से स्मार्टफोन किस दिशा में घूमा हुआ है, उसके बारे में बताता है। जब भी हम कोई वीडियो स्मार्टफोन में देख रहे होते हैं, तो उसे पोर्ट्रेट मोड की जगह लैंडस्केप मोड में देखना पसंद करते हैं, जिससे कि वीडियो फुल स्क्रीन पर देख सकें। इसके लिए जैसे ही हम स्मार्टफोन को लैंडस्केप मोड में घुमाते हैं, फोन में चल रहे वीडियो का ओरिएंटेशन भी लैंडस्केप हो जाता है। ध्यान रहे, यह सेंसर तभी काम करता है, जब आपने फोन में ऑटो-रोटेशन इनेबल किया हो। इसे एक्सीलरोमीटर और जाइरोस्कोप सेंसर इसलिए कहा जाता है, क्योंकि स्मार्टफोन में रोटेशन के लिए दो सेंसर्स की जरूरत होती है, जिसमें एक्सीलरोमीटर इसके रेखीय त्वरण को और जाइरोस्कोप इसके घूर्णी कोण की गति को निंयत्रित करता है। एक्सीलरोमीटर सेंसर का इस्तेमाल कई स्वास्थ्य संबंधित ऐप्स के लिए भी किया जाता है।
प्रोक्सिमिटी सेंसर- जब कोई वस्तु स्मार्टफोन के समीप होती है, तो यह सेंसर उसकी मौजूदगी का पता लगा लेता है। यह सेंसर मुख्य रूप से स्मार्टफोन के ऊपरी हिस्से में फ्रंट कैमरे के पास लगा होता है। आमतौर पर जब आप कॉल आने या कॉल करने के लिए स्मार्टफोन को कान के पास ले जाते हैं, तो यह सेंसर स्मार्टफोन के डिस्प्ले की लाइट को स्वत: ऑफ कर देता है।
बैरोमीटर- यह सेंसर मूलरूप से स्मार्टफोन में इनबिल्ट जीपीएस चिप की मदद से काम करता है। इसकी मदद से ऊंचाई पर त्वरित गति से स्थान को लॉक करके डाटा इकट्ठा किया जा सकता है।

बायोमैट्रिक सेंसर- इसका इस्तेमाल आजकल लगभग सभी तरह के मिड रेंज और हाई रेंज के स्मार्टफोन्स में किया जा रहा है। इसकी मदद से स्मार्टफोन की सुरक्षा के लिए फिंगरप्रिंट सेंसर इसी सेंसर के जरिए काम करता है। यह सेंसर स्मार्टफोन में दर्ज किए गए अंगूठे या उंगली को स्कैन करके डाटा इकट्ठा कर लेता है। दूसरी बार, उसी अंगूठे या उंगली को इस सेंसर के पास रखा जाता है, तो वह इसकी जानकारी को इकट्ठा की गई जानकारी मे मिलाकर सही अंगूठे या उंगली की पहचान कर लेता है। भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण की वेबसाइट पर आधार के लिए इस्तेमाल में लाए जाने वाले डाटा के लिए बायोमैट्रिक सेंसर्स का इस्तेमाल किया जाता है। बायोमैट्रिक सेंसर में फिंगरप्रिंट के अलावा रेटिना स्कैनर भी आता है, जो फ्रंट कैमरे के साथ जुड़ा होता है। इसकी मदद से स्मार्टफोन के लॉक को रेटिना के स्कैन की मदद से भी लॉक-अनलॉक किया जा सकता है। इसके अलावा, इस सेंसर की मदद से हार्ट रेट को भी मापा जा सकता है, जो कई तरह के हार्ट रेट मापने वाले ऐप के साथ काम करता है। 

एंबिएंट लाइट सेंसर- यह सेंसर स्मार्टफोन के डिस्प्ले की ब्राइटनेस को रोशनी के हिसाब से एडजस्ट तो करता ही है साथ ही डिस्प्ले की ब्राइटनेस को स्वत: कम या ज्यादा करने में भी मदद करता है।
वर्चुअल रियलिटी सेंसर- वर्चुअल रियलिटी सेंसर मूलरूप से स्मार्टफोन के कैमरे के साथ मिलकर रियलिटी ऐप्स के साथ काम करता है। यह सेंसर स्मार्टफोन में कैमरा ऐप्स की मदद से एनिमेटेड तस्वीर भी निकाल सकता है, जैसा कि आजकल युवाओं में विभिन्न तरह के एनिमेटेड फेस वाली तस्वीर निकालने का प्रचलन है। यह सेंसर कई तरह के मोबाइल गेम्स खेलने में भी मददगार है। 

जीपीएस सेंसर- यह सेंसर आमतौर पर सभी स्मार्टफोन में इस्तेमाल किया जाने वाला सेंसर है। जीपीएस का मतलब होता है, ग्लोबल पोजिशनिंग सिस्टम यानी भूमंडलीय स्थिति निर्धारण प्रणाली। इस सेंसर की मदद से डिवाइस की लोकेशन पता करने में मदद मिलती है। यह सेंसर कई तरह के सैटेलाइट के साथ जुड़कर यह बता सकता है कि आप इस समय कहां हैं? यह सेंसर उस समय काम नहीं करता है, जब आप इनडोर या बेसमेंट में हों या फिर आसमान में घने बादल हों, क्योंकि इसे सैटेलाइट से जुड़ने में ये लेयर्स मुश्किलें पैदा करती हैं। साथ ही जीपीएस सेंसर स्मार्टफोन में इंटरनेट कनेक्टिविटी होने पर ही काम करता है यानी अगर आपके स्मार्टफोन में इंटरनेट डाटा बंद होता है, तो यह सेंसर काम नहीं करेगा। जीपीएस सेंसर इंटरनेट डाटा पर काम करता है। यह स्मार्टफोन की बैटरी को जल्दी डिस्चार्ज कर देता है, लेकिन इस सेंसर की मदद से ही कई तरह के मैप्स आपके स्मार्टफोन में काम करते हैं। अगर आपका स्मार्टफोन कहीं गुम हो जाता है, तो जीपीएस ट्रैकर की मदद से ही आपके स्मार्टफोन को तलाशने में मदद मिलती है।

डिजिटल कम्पास- इसमें मैग्नेटोमीटर सेंसर का इस्तेमाल किया जाता है, जो जमीन के चुंबकीय क्षेत्र के अनुसार काम करता है। इस सेंसर की मदद से स्मार्टफोन में इंस्टॉल डिजिटल कम्पास सही दिशा के बारे में जानकारी देता है।

हम से जुड़े रहने के लिए धन्यवाद्।